
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में लीडरशिप ट्रांजिशन की आहट अब तेज़ हो गई है। पार्टी के सबसे बड़े युवा चेहरे तेजस्वी यादव को जल्द ही राष्ट्रीय स्तर की बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 25 जनवरी को प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में तेजस्वी यादव को ‘राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष’ बनाए जाने का औपचारिक ऐलान हो सकता है।
बिहार से बाहर, अब नेशनल पॉलिटिक्स की उड़ान
अब तक तेजस्वी यादव की पहचान मुख्यतः बिहार की राजनीति तक सीमित मानी जाती रही है, लेकिन यह फैसला उन्हें सीधे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ले आएगा।
राजद के भीतर इसे संगठनात्मक मजबूती, युवा नेतृत्व को आगे लाने और 2029 की राजनीति की नींव के तौर पर देखा जा रहा है।
लालू यादव का उत्तराधिकार संकेत?
राजनीतिक गलियारों में यह फैसला लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक उत्तराधिकार का स्पष्ट संकेत भी माना जा रहा है।
बीते कुछ वर्षों में तेजस्वी यादव ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आक्रामक भूमिका निभाई। चुनावी रणनीति में खुद को साबित किया और RJD का चेहरा बनकर BJP को सीधी टक्कर दी।
यानी अब पार्टी उन्हें सिर्फ “युवा नेता” नहीं, बल्कि नेशनल फेस के तौर पर पेश करने की तैयारी में है।

25 जनवरी की बैठक क्यों अहम है?
इस बैठक में सांसद, विधायक, राष्ट्रीय पदाधिकारी और पार्टी के सीनियर नेता मौजूद रहेंगे। यहीं तेजस्वी यादव की ‘ताजपोशी’ पर अंतिम मुहर लग सकती है।
अगर प्रस्ताव पास होता है, तो यह RJD के इतिहास में सबसे बड़ा संगठनात्मक बदलाव माना जाएगा।
आगे क्या बदलेगा?
इस कदम से तेजस्वी यादव की भूमिका बिहार से बाहर राज्यों में भी बढ़ेगी। लोकसभा चुनावों से पहले विपक्षी राजनीति में उनका कद मजबूत होगा और RJD को एक नेशनल कनेक्टिंग लीडर मिलेगा
साफ़ है— यह सिर्फ पद नहीं, पावर शिफ्ट है।
RJD अब चुनावी राजनीति के साथ-साथ लीडरशिप रीब्रांडिंग मोड में है। 25 जनवरी को अगर तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कमान मिलती है, तो यह पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने वाला फैसला होगा।
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